पांच दिवसीय शिव महापुराण का समापन

पंच कुंडीय श्री राम महायज्ञ की पूर्णाहुति, 21 वैदिक ब्राह्मण दे रहे थे आहुतियां


भवसागर से पार पाने के लिए भगवान शिव समखन बनना होगा,बुराइयों को आत्मसार करे, और अच्छाइयों को ग्रहण करें…  पंडित महेश गुरूजी उज्जैन वाले
इंदौर। मनुष्य को जीवन जीने की कला धर्म ग्रंथो में बताई है भगवान शिव की तरह बुराइयों को आत्मसात कर अच्छाइयों पर चलेंगे तो भवसागर से पार हो जाएंगे, संसार में अच्छाई और बुराई दोनों सर्वत्र व्याप्त है मनुष्य का कर्तव्य है कि वह अपने विवेक से बुराइयों को छोड़ अच्छाइयों को ग्रहण करें और जीवन को शुभ मंगल बनाएं।
यह विचार पांच दिवसीय शिव महापुराण के समापन पर उज्जैन के ख्यात पंडित महेश गुरूजी ने व्यक्त किया। संगम नगर श्री राम मंदिर एवं शिव शक्ति मंदिर रह वासी संघ और भक्त मंडल ने विशाल पंडाल लगाकर 30 जनवरी से 5 फरवरी तक शिव महापुराण कथा मैं सैकड़ो की संख्या में सहभागिता दी। इस अवसर पर 21 वैदिक ब्राह्मण के द्वारा पंच कुंडी श्री राम महायज्ञ का आयोजन भी सोमवार को समापन हुआ।मुख्य यजमान विश्व ब्राह्मण समाज संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष योगेंद्र  महंत पूर्व राज्य मंत्री दर्जा मध्य प्रदेश सरकार, और भूपेंद्र कौशिक  पवित्र कौशिक थे संगम नगर श्री राम शिव शक्ति मंदिर समिति के  अरविंद  गुप्ता, गजराज सिंह चौहान, गोविंद सिंह पवार, सुरेंद्र बाजपेई, लकी अवस्थी, अनूप जोशी, प्रफुल्ल कुलश्रेष्ठ, पराग  कौशल, सुरेंद्र मेहता, मदन सिंह बेस, नंदकिशोर  लखोटिया, प्रवीण गुप्ता, इंजी.केपी सिंह आदि ने व्यासपीठ  का पूजन कर आरती की।

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