रत्न पत्थरों से निर्मित प्रतिमाओं की अद्भुत छटा पूर्वी क्षेत्र के पाश्व कल्प तरु धाम में

भगवान पाश्वर्वनाथ का जन्मोत्सव बनाएगा श्वेतांबर जैन समाज

इंदौर। पश्चिम क्षेत्र में श्वेतांबर जैन समाज का दिव्य अलौकिक मंदिर बनाया गया है जिसमें भगवान एवं गुरुदेव की प्रतिमाएं रत्न पत्थर से निर्मित है यहां पर श्री शत्रुंजय तीर्थ और श्री सम्मेद शिखर तीर्थ की देवकूलिकाएं भी दर्शनार्थियों को अपनी ओर आकर्षित करती है सोने और चांदी के वर्क भी मंदिर परिसर में इन प्रतिमाओं की शोभा बढ़ा रहे हैं, नए साल के पहले सप्ताह में श्वेतांबर जैन समाज यहां पर भगवान पार्श्वनाथ गुरुदेव का जन्मोत्सव मनाने जा रहा है।
श्री धरणीधर पार्श्वनाथ श्वेतांबर जैन मूर्ति पूजक ट्रस्ट एवं श्री संघ हाईलिंक बांगडदा रोड सिटी बांगदा रोड इंदौर के द्वारा भगवान पार्श्वनाथ का जन्मोत्सव 6 जनवरी 2024 को मनाने जा रहा है। पुंडरीक पालरेचा, पीयूष भाई संघवी ने बताया कि भगवान पाश्वनाथ के जन्मोत्सव पर पूज्य श्री अमित गुणा श्री जी महाराज सा. का सानिध्य रहेगा। इस अवसर पर समाजजन सुबह 8:00 बजे से जन्मोत्सव में शामिल हो जाएंगे। पश्चिम क्षेत्र के हाईलिंक सिटी ममे बने विशाल मंदिर परिसर में सजा की जाएगी।
राजस्थान के कुमारी मार्बल से मंदिर की अद्भुत छटा
पुंडरीक पालरेचा ने बताया कि वर्ष 2015 में हाईलिंक सिटी कॉलोनी में 100 बाय 50 के 5000 स्क्वायर फीट राजस्थान के कुमारी मार्बल से भव्य मंदिर की स्थापना की गई थी इस मंदिर निर्माण में किसी भी प्रकार के सरिया या कल का उपयोग नहीं किया गया है यहां पर पत्थरों को विशेष प्रकार की इंटरलॉकिंग सिस्टम से जोड़कर विशाल और मनमोहक आकृति मंदिर को प्रदान की गई है जिसे देखने वाले भी आश्चर्य चकित रहते हैं।
रत्न पत्थरों की प्रतिमाए
पुंडरीक पालरेचा मंदिर परिसर को दो भागों में बनाया गया है प्रथम भाग में प्रवेश के भगवान आदिनाथ, भगवान महावीर स्वामी, भगवान शांतिनाथ, भगवान मुनी सुवृत,के साथ गुरुदेव गौतम स्वामी और सागरानंद सुरी जी की प्रतिमाएं विराजित है सभी प्रतिमाएं अलग-अलग रत्न पत्थरों से निर्मित है इन प्रतिमाह के निर्माण में नीलम, गोमेद ,मरगज, स्फटीक आदि रत्न पत्थर से प्रतिमाओं का निर्माण किया गया है पुंडरीक पालरेचा ने बताया कि इस प्रकार रत्न पत्थरों की प्रतिमाओ वाला प्रदेश का यह पहला श्वेतांबर जैन समाज का मंदिर है यहां एक साथ इतनी प्रतिमाएं विराजित है। इसके साथ इस मंदिर में मुख्य रूप से भगवान पार्श्वनाथ की जरमोरा रत्न पत्थर की आकर्षक प्रतिमा विराजित है जिस पर 6 जनवरी को जन्मोत्सव मनाया जाएगा प्रतिमा के पीछे स्वर्ण रजत की नक्काशी भी मंदिर को प्रतिमा को भव्य व आकर्षक स्वरूप में दर्शाती है। मंदिर के दूसरे हाल में अधिष्ठायक देव मणिभद्र जी, भोमिया जी देव, नाकोड़ा भैरव का सिंहासन विराजित है इसके साथ ही अधिष्टयक देवी माता पद्मावती, माता सरस्वती और माता लक्ष्मी की प्रतिमाएं भी विराजित है। इस मंदिर में श्वेतांबर जैन समाज के तीर्थ स्थल श्री समेद शिखर जी, श्री शत्रुंजय महातीर्थ की प्रतिकृति भी चांदी के वर्क में निर्मित है जो देखने व दर्शन करने वालों को तीर्थ स्थल का भान कराती हैं।


नवकार मंत्र के 9 पदों की सिद्ध चक्र पर नक्काशी
पुंडरीक पालरेचा ने बताया कि जैन समाज में नवकार मंत्र की महिमा को सभी महत्व देते हैं और जाप भी हर घर में किया जाता है इसी आस्था को देखते हुए मंदिर परिसर में रत्न पत्थर पर श्री नवकार मंत्र स्वरूप सिद्ध चक्र बनाया गया है जिसमें नव पद रूप में परमात्मा विराजित है।
आठ सालों से लगातार बढ़ रहा दर्शनों के लिए आ रहे श्रद्धालु
वर्ष 2015 में मंदिर निर्माण के बाद से अब तक अब तक तकरिबन 8 सालों में लगातार दर्शनों के लिए यहां पर श्वेतांबर जैन समाज जन संख्या में आ रहे हैं रोजाना 100 से ज्यादा जैन समाज जन पूजन के लिए शामिल होते हैं इसके साथ ही समय-समय पर धार्मिक आराधनाएं प्रदूषण पर्व और साधु साध्वी भगवन आना भी यहां होता है।
–6 जनवरी को उपाश्रय की होगी घोषणा
पश्चिम क्षेत्र के इस दिव्य रत्न पत्थरों की प्रतिमाओ से निर्मित मंदिर परिसर में साधु – साध्वी जी भगवन्तो के रुकने के लिए उपाश्रय की आवश्यकता भी है इसलिए 6 जनवरी को भगवान पार्श्वनाथ के जन्मोत्सव पर यहां उपाश्रय भूमि पूजन की घोषणा की जाएगी।

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