जन्माष्टमी पर मध्यप्रदेश के 29 स्थलों पर सजेगा ‘श्रीकृष्ण पर्व’

 

भोपाल श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर मध्यप्रदेश में आस्था और संस्कृति का अनूठा संगम देखने को मिलेगा। श्रीकृष्ण पाथेय न्यास और मध्यप्रदेश शासन के संस्कृति विभाग की ओर से प्रदेश के 29 ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों पर ‘श्रीकृष्ण पर्व’ का आयोजन किया जा रहा है। कार्यक्रमों में प्रदेश और देश के प्रसिद्ध कलाकार भगवान श्रीकृष्ण के जीवन-दर्शन, उनकी लीलाओं, लोकमंगल की भावना और उनके विविध स्वरूपों को अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से जीवंत करेंगे।
संगीत और नृत्य से सजेगा आयोजन
‘श्रीकृष्ण पर्व’ के दौरान संगीत, नृत्य, नाट्य सहित विभिन्न पारंपरिक कला विधाओं की प्रस्तुतियां होंगी। इनके माध्यम से संबंधित स्थलों की ऐतिहासिकता, पौराणिकता और सांस्कृतिक विशेषताओं को सामने लाया जाएगा। आयोजन का उद्देश्य केवल जन्माष्टमी उत्सव तक सीमित नहीं है, बल्कि श्रीकृष्ण के जीवन संदेश और भारतीय कला-संस्कृति की समृद्ध परंपरा को आम लोगों तक पहुंचाना भी है।
कृष्ण से जुड़े ऐतिहासिक स्थल भी शामिल
संस्कृति विभाग के संचालक एनपी नामदेव के अनुसार, पर्व के लिए चुने गए 29 स्थलों में कई ऐसे स्थान शामिल हैं, जिनका संबंध भगवान श्रीकृष्ण और द्वापर युग की परंपराओं से जोड़ा जाता है। इनमें सांदीपनी आश्रम और नारायणा धाम (उज्जैन), अमझेरा, जानापाव (महू) और जामगढ़ (रायसेन) प्रमुख हैं। इसके अलावा कई प्राचीन मंदिरों और धार्मिक केंद्रों को भी आयोजन स्थल बनाया गया है, जिनका धार्मिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व है।
नई पीढ़ी को विरासत से जोड़ने की पहल
संस्कृति विभाग के मुताबिक, मध्यप्रदेश की धरती भगवान श्रीकृष्ण से जुड़े अनेक पौराणिक और सांस्कृतिक संदर्भों को समेटे हुए है। श्रीकृष्ण के जीवन-मूल्यों जैसे धैर्य, मित्रता, करुणा और दया को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से इन आयोजनों को सांस्कृतिक स्वरूप दिया जा रहा है।
इस पहल के जरिए प्रदेश की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान देने के साथ नई पीढ़ी को भी अपनी गौरवशाली परंपराओं से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। इस वर्ष ‘श्रीकृष्ण पर्व’ के आयोजन स्थलों की संख्या में भी वृद्धि की गई है, ताकि प्रदेश के विभिन्न अंचलों के सांस्कृतिक महत्व वाले स्थलों पर स्थानीय गतिविधियों को व्यापक मंच मिल सके।

Source – EMS