पातल भुवनेश्वर: सर्प की तरह रेंग कर भीतर जाना होगा।
Patal Bhubaneswar story

पाताल भुवनेश्वर, सरयू रामगंगा के बीच बसा हुआ है, जिसका मुख उत्तर दिशा में है। यहां के समतल स्थान तक पहुंचने के लिए आपको लगभग 84 सीढ़ियों को उतरना होता है। सबसे पहले आपको शेषनाग के दर्शन होते हैं दरअसल पाताल के पहली मंजिल में शेषनाग रहते हैए कुछ इस तरह की यहां की बनावट है जिसे देख लगता है कि सचमुच यहीं शेषनाग ने पृथ्वी को अपने उपर उठा रखा है। गुफा का मुख्य द्वार बहुत ही संकरा है। जिसमें एक बार में एक व्यक्ति ही उतार पाता है। लेकिन जैसे ही आप उस संकरे रास्ते से आगे बढ़ते हैं आपको देख हैरानी होगी आपके सामने एक ऐसा बड़ा मैदान है जिसमें करीब 4 हजार लोग एक साथ ठहर सकते हैं।
इन प्राकृतिक गुफाओं में कहीं कहीं आपको सर्प की तरह रेंग कर भीतर जाना होगा। दरअसल यहां की महिमा का स्कंदपुराण के मानसखंड अध्याय 103 में पातल भुवनेश्वर की गुफाओं का जिक्र किया गया है।
जहां त्रेता युग में अयोघ्या के राजा रितुपूर्ण की कहानी विस्तार से बताई गई है। अंदर प्राकृतिक गुफाओं की बनावट ही कुछ इस तरह है कि देखने में शेषनाग के फन, कमल के फूल के ठीक नीचे गणेश जी का धड जिसका जलाभिषेक होता रहता है, गुफा के भीतर र्दाइं ओर केदारनाथ, बद्रीनाथ और अमरनाथ तीनों मूर्तियां ठीक उसी तरह हैं जैसे वे उनके मूल स्थानों में हैं। यहां चार द्वार भी हैं जिन्हें रणद्वार, पापद्वार धर्मद्वार व मोक्षद्वार कहा जाता है।
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यहां से कुछ आगे चलकर सप्तकुंड है, जिनमें लगातार पानी एकत्र होता है पुराणों में कहा गया है कि इन कुुंडो में पानी के साथ अमृत भी बहता था। इसलिए आज भी इन कुंडो से जल को पीने में मनाही है। सिर्फ जलाभिषेक किया जा सकता है। इसी गुफा में 33 करोड़ देवी-देवाताओं के बीचों बीच भगवान शंकर का नर्मदेश्वर लिंग है, जिसके बारे में कहा जाता है कि यहां नदी के तेज बहाव वाले जल को भी लिंग में सोखने की शाक्ति है। यहीं कुछ दूरी पर आकाश गंगा है जिस पर लंबी लंबी तारों की कतार है। इनके अलावा गुफा के भीतर हाथ में अस्त्र-शस्त्र लिए देवी भुवनेश्वरी, ब्रह्माजी का बतख, स्वर्ग का कल्पवृक्ष, कामधेनु गाय के थन, महादेव की जटाएं, सप्तऋशि मंडल, इंद्रदेव का हाथी ऐरावत के हजार पैर आदि। ऐसा लगता है मानों देवी देवता आप पर प्रसन्न हो दशर्न देने साक्षत सामने खड़ें हों। स्कंद पुराण में यहां के दशर्न से चारधाम यात्रा के दशर्न का फल मिलने का वर्णन भी किया गया है।

कुमाऊँ का एक ऐसा स्थान पर जहाँ पर भगवान शिव अपने तैतीस करोड़ देवी-देवताओं के साथ पहाड़ के गर्भ में पाताल के अंदर एक गहरी गुफा में विराजमान हैं, उस जगह का नाम है पाताल भुवनेश्वर । आईये चलते हैं, पाताल भुवनेश्वर की अचंभित कर देने वाली पवित्र गुफा की यात्रा पर ।
पाताल भुवनेश्वर घने चीड़, देवदार के वन और सुन्दर पर्वत घाटियों के बीच बसा सुरम्य स्थल हैं, जहाँ से हमारे देश के सिरमौर पर्वतराज हिमालय की दूर तक की बर्फ से ढकी मुख्य चोटियों का मनोहारी दर्शन होते हैं । Patal Bhubaneswar: One has to crawl inside like a snake. इसी नैसर्गिक सौंदर्य का खजाने के बीच यहाँ का मुख्य आकर्षण है, एक अति-प्राचीन, रहस्यमयी, अद्भुत भूमिगत गुफा जो पहाड़ के अंदर पाताल में लगभग 90 फुट नीचे हैं । यह चूने पत्थर की प्राचीन गुफा भगवान शिव और तैतीस करोड़ देवी-देवताओ को समर्पित हैं और हिंदू धर्म में वर्णित पौराणिक गाथाओ को दर्शाते नजर आते हैं । इस गुफा की खोज त्रेता युग राजा ऋतुपर्ण के द्वारा गयी थी । पुन: द्वापर युग इस गुफा की खोज पांडवो के द्वारा की गयी थी ।
Source – Shiv Prabha