Diwali Shubh Muhurat 2023: दीपावली का शुभ मुहूर्त क्या है, गरुड़ वाहिनी महालक्ष्मी

दीपावली पर्व जीवन में एक नई उमंग और उल्लास का वातावरण बना देता है। इस दिन एक अलग ही ऊर्जा शरीर में रहती है। सब कुछ साफ स्वच्छ, सुगंधित माहौल और घर और घर के बाहर का आभा मंडल देखने लायक होता है। हर साल की तरह इस साल भी दीपावली अत्यंत शुभ योगो में आ रही है। आइए इस लेख के माध्यम से हम जानते हैं महालक्ष्मी और भगवान विष्णु का दीपावली से क्या संबंध है एवं दीपावली के शुभ मुहूर्त क्या है।
युगों-युगों से मनाया जाने वाला यह पर्व क्यों मनाया जाता है। एक स्वाभाविक जिज्ञासा होती है। सर्वप्रथम महालक्ष्मी पूजन के लिए जो कि विश्व के पालनकर्ता भगवान विष्णु की पत्नी है एवं ऐश्वर्य व संपदा की देवी है। उनकी प्रसन्नता के लिए दूसरे संसार को प्रकाशित करने वाले तीन कारकों में से एक दीप ज्योति के पूजन के लिए, तीसरे भगवान रामचंद्र के द्वारा रावण वध एवं लंका विजय के पश्चात् अयोध्या वापस लौटने पर राज्याभिषेक के अवसर पर प्रसन्नता जाहिर करने हेतु। इसके अतिरिक्त भी अनेकों कारण इस पर्व को मनाने के लिए हैं किंतु विशेष कारण ये माने जाते हैं।
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भगवान राम का राज्याभिषेक अनेक द्वारा रावण वध एवं लंका विजय अर्थात बुराईयों पर अच्छाई की विजय एवं 14 वर्षों के वनवास के पश्चात् अयोध्या वापसी के अवसर पर सारा समाज दीप-मालिका करके प्रसन्नता व्यक्त करता है।
विश्व का अस्तित्व प्रकाश के बिना असंभव है। यह वैज्ञानिक व्यवहारिक तथ्य है। वर्तमान समय की उन्नत वैज्ञानिक शोध भी यह तथ्य स्वीकार करती है। संसार को प्रकाशमान करने वाली 3 वस्तुएं प्रत्यक्ष हैं-सूर्य, चंद्र, अग्नि। कार्तिक कृष्ण अमावस्या अर्थात् दीपावली के दिन अमावस्या होने के कारण रात्रि में चंद्रमा नहीं होता हैं।
इसलिए प्रकाश का एक माध्यम उपलब्ध ही नहीं रहता है। सूर्य रहते हुए भी शक्तिहीन होता है क्योंकि उस दिन सूर्य तुला राशि में होने के कारण नीच राशि का रहता है। इसलिए सूर्य होते हुए भी कमजोर रहता है। इसलिए प्रकाश का माध्यम केवल अग्नि, दीपक होता है। इसलिए दीपक के पूजन का एवं दीपमालिका का विशेष महत्व है।
धन, वैभव, ऐश्वर्य एवं संपदा की देवी होने के कारण आम व्यक्ति की भावना महालक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए उनकी पूजा करने की होती है। यह पौराणिक सत्य है लक्ष्मी वाहन उल्लू होता है। किंतु सत्य है जहां आवश्यकता से अधिक वैभव हुआ है वहां का संतुलन बिगड़ा है, वहां के लोगों का आचरण बिगड़ा क्योंकि अकेली महालक्ष्मी अपने वाहन उल्लू पर सवार होकर आती है बिरले ही लोग अपना संतुलन रख पाते हैं। किंतु महालक्ष्मी अपने पतिदेव विष्णु के साथ पधारती हैं तो वे गरुरवाहिनी होती है, क्योंकि विष्णुजी का वाहन गरुड़ है और अर्धांगिनी होने के नाते वे भगवान विष्णु के साथ उनके वाहन गरुड़ पर बैठती है। Diwali Shubh Muhurat 2023
मनुष्य का मन एवं विचार ही उसे उत्थान या पतन की ओर ले जाते हैं और मन व गरुड़ की गति समान होती है। अर्थात् मन ही गरुड़ है एवं केवल विष्णु ही गरुड़ पर सवारी कर सकते हैं और मन को नियंत्रित कर सकते हैं। इसलिए भी भगवान विष्णु का पूजन आवश्यक है ताकि वे अपनी अर्धांगिनी महालक्ष्मी द्वारा दिए गए वैभव के कारण पतन की ओर जा रहे प्राणी को बचा सकें। लक्ष्मी का आव्हान एवं पूजा ही उचित है ना कि उल्लू का वाहिनी का।
दीपावली शुभ मुहूर्त
वैसे तो दीपावली का पूरा दिन ही शुभ माना जाता है लेकिन कुछ विशेष समय ऐसे होते हैं जहां ग्रह नक्षत्रों का मिलाप काफी शुभफलदायी रहता है। दिवाली की पूजा का शुभ मुहूर्त 12 नवंबर की शाम 5 बजकर 40 मिनट से लेकर 7 बजकर 36 मिनट तक है। वहीं लक्ष्मी पूजा के लिए महानिशीथ काल मुहूर्त रात 11 बजकर 39 मिनट से मध्यरात्रि 12 बजकर 31 मिनट तक है।
Article Post By – Rahul
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