मध्यस्थता के अभाव से दम तोड़ रहे हैं संबंध

Relations are dying due to lack of mediation

भारतीय समाज में विवाह संस्कार को समाज का मजबूत आधार माना है। इस आधार पर समाज का निर्माण हुआ उससे समाज को सर्वसुविधायुक्त बनाना, मिलनसारिता बढ़ाना और विवाह संस्कार को महत्वपूर्ण स्थान दिया है जिसमें एक-दूसरे की बेटी को अपनाना।

समाज की मूलभूत आवश्यकताओं को संयुक्त प्रयासों से पूर्ण करना सहयोग करना। किंतु आज सहयोग मध्यस्थता का अभाव दिखाई दे रहा है। शादी-विवाह के संबंध तय करवाने में पंचों का ज्यादा महत्व माना जाता था, आज पंच कार्यकारिणी में तब्दील हो चुके हैं। यही पंच लोग परिवार की पूरी जानकारी रखते थे और शादी संबंध तय करवाने में अपनी भूमिका निभाते थे।\

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समाज में हाल ही में पांच तय संबंध वैचारिक मतभेद और समझ के अभाव में टूटने के कगार पर पहुंच गए। ऐसा इसलिए हुआ कि मध्यस्थता करने वाले का अभाव था। आपसी समझ में फर्क आने लगा। वैचारिक भावनायें कुंठाग्रस्त हो गई और प्रथाओं और संस्कार का नजरिया बदल गया।

हमारे समाज में मध्य की भूमिका निभाने वालों का अभाव है। इसी कारण भी साइलेंट किलर, दस्तक दे रहा है जातिबंधु विजातीय समाज की ओर विमुख हो रहे हैं। पंचों (कार्यकारिणी) को समाज को जोड़ने और संबंध तय करवाने में बड़ी भूमिका निभाने की आवश्यकता है। पूरे प्रदेश की कार्यकारिणी को सजग रहना होगा, समाज नये दौर से गुजर रहा है, उसमें तटस्थ की भूमिका नहीं निभाये। लड़का-लड़की की पूरी जानकारी एकत्रित की जाकर समाज को उपलब्ध करवाना पहली प्राथमिकता होना चाहिए एवं अन्य सहयोगी समाजबंधु भी आगे आएंगे और समाज बंधुओं को विवाह संबंध उपलब्ध करवाने और तय करवाने में सहयोग करेंगे। ऐसा विश्वास है।