“लघुकथा- गणेशजी की मूर्ति
गणेश चतुर्थी पर स्थापना के 3 शुभ मुहूर्त

“लघुकथा- गणेशजी की मूर्ति”शाम का समय और रोड पर एक छोटी सी आठ नौ साल की की बच्ची बेतहाशा भाग जा रही थी और उसके पीछे बहुत सारे लोग दौड़ रहे थे और वह अपनी फटी फ्रॉक में कुछ छुपा कर ले जा रही थी लोगों ने चोरी के आशंका में उसका पीछा करना शुरू कर और वह भागते-भागते एक पत्थर से टकराकर नीचे गिर गई और लोगों ने उसे पकड़ लिया और पूछा बता तेरे फ्रॉक के अंदर क्या है, और क्या छुपा रखा है जरूर तू उसे सेट के यहां से कुछ चोरी चोरी करके भागी है और किसी को कुछ बात भी नहीं रही है वह लड़की रोने लग गई और बोलने लगी साब-साब मैंने कुछ भी नहीं चुराया है मैं तो बस एक छोटी सी मूर्ति छोटी गणेश भगवान की लेकर जा रही हूं मेरे घर में मां पापा बीमार है और पैसे भी नहीं है और मैं आज भगवान गणेश जी की पूजा कर उनसे अपने मां पापा के के अच्छे स्वास्थ्य स्वास्थ्य की प्रार्थना करूंगी ताकि वह जल्दी से जल्दी अच्छी हो जाए और हमारे यहां फिर पहले जैसी सब ठीक हो जाए जब लोगों ने उसके मुंह से ऐसा सुना तो सुनकर दंग रह गये तभी एक सज्जन पुरुष ने उसकी व्यथा सुनी तो उनका मन भर आया और उन्होंने उसको उठाया और उसके गंदे कपड़े साफ किये और बोले बेटा कहां रहते हो मुझे तुम्हारे मां पापा से मिलना है जब वह बोली कि वह एक टूटी सी झोपड़ी में रहती हैं और घर में खाने का कुछ भी नहीं है तभी वह सज्जन बोले ठीक है बेटे चलो पहले तुम्हारे मां पापा के लिए दवाई और कुछ खाने का सामान ले लेते हैं फिर घर चलते हैं जब उन सज्जन ने उसके घर की दशा देखी तो उनका मन उदास हो गया और उसके मम्मी पापा से बोले आज से आपको इस टूटी-फूटी झोपड़ी में रहने की कोई जरूरत नहीं है मेरा घर बहुत बड़ा है और वहां आप लोग आराम से रह सकते हैं उसे लड़की से बोले तुम्हारे पापा मेरे घर पर मेरे घर की चौकीदारी कर लेंगे और तुम्हारी मां मेरे घर पर घर का काम कर दिया करेंगी और बेटा आगे की पढ़ाई करने की जिम्मेदारी अब मेरी है अब तुम सदा खुश रहना और निराश मत होना भगवान गणेश सब अच्छा करेंगे।
गणेश चतुर्थी पर स्थापना के 3 शुभ मुहूर्त
भादों माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि 6 सितंबर को दोपहर 03.01 पर शुरू होगी और 7 सितंबर 2024 को शाम 05.37 तक रहेगी. गणेश पुराण के मुताबिक गणपति का जन्म चतुर्थी तिथि और चित्रा नक्षत्र में मध्याह्न काल, यानी दिन के दूसरे पहर में हुआ था. 7 सितंबर को ये शुभ काल सुबह 11.20 बजे से शुरू हो रहा है
Source – प्रेम जी वेद