अमृत सिद्धि योग और सर्वार्थ सिद्धि योग में शुरुआत होगी चैत्र नवरात्र की
Chaitra Navratri 2024

इस बार चैत्र नवरात्र काफी खास रहने वाला यह यह अच्छे योग में आ रहा इसमे मुहूर्त का बहुत विशेष महत्व रहेगा… आज हम इस लेख मे आपको घटस्थापना और खास मुहूर्त की जानकारी भी देंगे….
घटस्थापना नवरात्रि के दौरान महत्वपूर्ण कर्मकाण्डों में से एक है।
इसी से नौ दिन के उत्सव की शुरुआत होती है। हमारे शास्त्रों में घटस्थापना के लिये नियमों और दिशा निर्देशों को अच्छी तरह से वर्णित किया गया है। घटस्थापना कर नवरात्रि की शुरुआत एक निश्चित अवधि के दौरान मुहूर्त देख के ही की जानी चाहिये। घटस्थापना से भगवती दुर्गा का आवाहन कर पूजा के लिये निमन्त्रित किया जाता है और हिन्दु शास्त्रों के अनुसार गलत समय पर किया जाने वाला आवाहन देवी शक्ति का क्रोध और प्रकोप ला सकता है। Chaitra Navratri
अत: घटस्थापना मुहूर्त का चयन अत्यधिक महत्तपूर्ण है। घटस्थापना के लिये अमावस्या तिथि और रात्रि का समय निषिद्ध है। घटस्थापना का मुहूर्त, प्रतिपदा तिथि में दिन के पहले एक तिहाई भाग में, सबसे उपयुक्त होता है। कुछ कारणों की वजह से यदि मुहूर्त इस समय उपलब्ध नहीं है तो घटस्थापना अभिजीत मुहूर्त के दौरान की जा सकती है। नवरात्रि घटस्थापना चित्रा नक्षत्र और वैधृति योग के दौरान टालने की सलाह दी जाती है, लेकिन चित्रा नक्षत्र और वैधृति योग का निषिद्ध नहीं है। घटस्थापना का मुहूर्त विचार करने के लिए सबसे महत्वपूर्ण कारक प्रतिपदा तिथि और दोपहर से पहले का समय है। द्रिक पञ्चाङ्ग घटस्थापना के लिए श्रेष्ठ मुहूर्त उपलब्ध करता है। इस पृष्ठ पर दिया गया मुहूर्त हिन्दु शास्त्रों के अनुसार निर्धारित है। द्रिक पञ्चाङ्ग 20,000 से भी अधिक शहरों के लिए घटस्थापना मुहूर्त उपलब्ध करता है। सभी मुहूर्तों के लिये स्थानीय समय डीएसटी समायोजित कर दिया जाता है।
घटस्थापना मुहूर्त की गणना स्थानीय सूर्योदय, सूर्यास्त और दोपहर के समय को देख कर की जाती है और इसीलिए सभी शहरों के लिये पृथक-पृथक होती है। हम घटस्थापना के लिये चौघड़िया मुहूर्त लेने की सलाह नहीं देते हैं क्योंकि धार्मिक स्रोतों में इसका कोई प्रमाण नहीं मिलता है। घटस्थापना को कलश-स्थापना के नाम से भी जाना जाता है। इस पृष्ठ पर दिये घटस्थापना मुहूर्त के लिये द्वि-स्वभाव लग्न को समायोजित करने के लिये यथा-सम्भव प्रयास किया जाता है। मीन लग्न, जो कि द्वि-स्वभाव लग्न है, चैत्र नवरात्रि के दौरान प्रात:काल के समय व्याप्त होती है। यदि मीन लग्न के दौरान मुहूर्त निकलता है तो उसे प्राथमिकता दी जाती है।

मां आदिशक्ति की साधना और आराधना के पर्व चैत्र नवरात्र की शुरुआत 9 अप्रेल से होगी। इस बार नवरात्र की शुरुआत सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग के शुभ संयोग में होगी। इसी प्रकार 9 दिन भी ग्रह नक्षत्रों के लिहाज से कई शुभ संयोग रहेंगे। ऐसे में नवरात्र में खरीदारी के लिए भी कई शुभ योग विद्यमान रहेंगे।
9 से 17 अप्रेल तक रहेंगे नवरात्र
चैत्र नवरात्र की शुरुआत 9 अप्रेल से होगी और 17 अप्रेल तक रहेंगे। यह साल के प्रथम नवरात्र होते हैं। इस नवरात्र में साधना का विशेष महत्व है। इसी प्रकार अश्विन माह में आने वाले नवरात्र आराधना के लिए विशेष माने गए हैं। नवरात्र में माता रानी की साधना, आराधना के साथ खरीदारी सहित सभी प्रकार के शुभ कार्य करना भी अत्यंत फलदायी माना जाता है। ऐसे में नवरात्र के पूरे नौ दिन खरीदारी और शुभ कार्यों के लिए विशेष शुभ होंगे।
इस बार नवरात्र में कई शुभ योग भी विद्यमान रहेंगे। इस लिहाज से नवरात्र और अधिक खास होंगे। नवरात्र में दो दिन सर्वार्थ सिद्धि योग और एक दिन अमृत सिद्धि योग का संयोग रहेगा। इसी प्रकार पांच दिन रवि योग भी रहेगा। पं. विष्णु राजौरिया का कहना है कि वैसे तो नवरात्र के सभी दिन शुभ कार्यों के लिए उत्तम फलदायी माने गए हैं, लेकिन इन दिनों में आ रहे शुभ योग इसकी शुभता को और अधिक खास बनाएंगे। नवरात्र में भूमि, भवन, वाहन, आभूषण सहित सभी प्रकार की स्थायी खरीदारी करना शुभफलदायी माना गया है। इस माता माता रानी का आगमन अश्व पर होगा।
जलेगी अखंड ज्योत
शहर के मंदिरों में भी नवरात्र की तैयारियां शुरू हो गई हैं। नवरात्र के नौ दिन मंदिरों में अखंड ज्योत जलाई जाएगी और नौ दिन नौ अलग-अलग स्वरूपों में माता रानी का श्रृंगार किया जाएगा। मंदिरों में विशेष अनुष्ठान होंगे। शहर के नेहरू नगर सिद्धेश्वरी मंदिर, मां वैष्णोधाम, दुर्गाधाम मंदिर अन्य मंदिरों में अखंड ज्योत जलाई जाएगी।
source – deepak yadav