मर्यादा एवम धैर्य के प्रतिमूर्ति ,”पुरुषोत्तम भगवान राम”

The epitome of dignity and patience, "Purushottam Lord Ram"
The epitome of dignity and patience, “Purushottam Lord Ram”

मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु राम का जीवन सदैव पापाचार रहित, मर्यादित रहते हुए,सदाचारी, करुणामय धर्म मार्ग पर चलते हुए आदर्श सहनशील धैर्यधारी पुरुष के रूप उनके सद्गुणो के रूप में जन्मोजन्म पूजे जाएंगे। मर्यादित जीवन अर्थात उनका प्रत्येक सामाजिक,पारिवारिक नैतिक(अहिंसा,सत्य,प्रेम,अचौर्य,अपरिग्रही) ऐसे सहृदयी, धर्मी सभी को सम्मान स्नेह देने वाले प्रभु धीर गम्भीर रूप प्रजाजनों के भी अति प्रिय रहे,और प्रभु श्री राम के रूप पूजे जाते हैं।

नैतिक मूल्यवान ऐसे प्रभु श्री राम आपके ज्ञान रत्न की आभा से जीवन मे उच्चता प्राप्त कर ,समाज की दशा एवम दिशा बदलने में कृपा रही है। *अधर्म,अन्याय,अनीति के संहार करने वाले प्रभु श्री राम के हाथों , रावण की बुराइयों का अंत किया गया तभी से तो कहा जाता है राम राज्य आ गया । मनुष्य स्वयं के अन्दरके पापाचार ,हिंसा,कुशील, परिग्रह को नष्ट कर मर्यादित विचार,*सदव्यवहार एवम समानता से ,चलित राज्य ही राम राज्य बना सकता है । और वही किया प्रभु श्री राम ने। *समानता एवम एकता की भाषा हो हर प्रजाजन के लिए, पारस्परिक सम्बन्धों को मर्यादा पूर्वक,स्नेह से,प्रत्येक नैतिक मूल्यों को स्वयं जीवन में उतारकर राज्य में लागू करने वाला ही मर्यादा पुरुषोत्तम कहला सकता है। ऐसे ही थे प्रभु श्री राम
एक राजकुमार होते हुए,पिता की इच्छा को शिरोधार्य कर गुरुकुल में रहना,तीनों माताओं के प्रति समान सम्मान,भाइयों के प्रति अति स्नेह,माता पिता के वचनों को शिरोधार्य करते १४ वर्षों तक विपरीत परिस्तिथियों में वन में भटकना ये सद्गुण ऐसे राजा राम में धैर्यपूर्वक गाम्भीर्य है ,मर्यादाएं हैं,सद्गुणी हैं। तभी तो आप मर्यादा पुरुषोत्तम राम कहलाए। सचमुच अगर हम में भक्त जनों में भी जनजन के प्रिय प्रभु श्री राम सी मर्यादित जीवन जीने की कला ,धैर्यता के साथ आ जाए, तो वो दूर नहीं जब राम राज्य आ जाए।जय बोलो पुरुषोत्तम प्रभु श्री राम की जय हो

लेखिका:प्रभा जैन इंदौर।