ईवी नीति के 5 साल बाद भी सरकारी विभाग पीछे, इंदौर बना प्रदेश का ईवी हब

लेकिन सरकारी विभागों ने नहीं खरीदे इलेक्ट्रिक वाहन
इंदौर। प्रदेश में वर्ष 2019 में लागू की गई इलेक्ट्रिक व्हीकल (ईवी) नीति के पांच साल बाद भी सरकारी विभाग ईवी अपनाने में काफी पीछे हैं। नीति के तहत सरकारी कार्यालयों में 30 प्रतिशत और सार्वजनिक परिवहन में 50 प्रतिशत इलेक्ट्रिक वाहनों का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन अब तक यह लक्ष्य जमीन पर दिखाई नहीं दे रहा।
जानकारी के अनुसार पिछले पांच वर्षों में प्रदेश के करीब 20 सरकारी विभागों ने नए वाहन खरीदे, लेकिन इनमें इलेक्ट्रिक वाहन शामिल नहीं किए गए। वहीं दूसरी ओर इंदौर प्रदेश में ईवी इंफ्रास्ट्रक्चर के मामले में सबसे आगे निकलकर सामने आया है। शहर में सबसे ज्यादा 167 पब्लिक और संस्थागत चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए जा चुके हैं, जो पूरे प्रदेश में सर्वाधिक हैं।
भोपाल में 133, जबलपुर में 89, ग्वालियर में 64 और उज्जैन में 49 चार्जिंग स्टेशन हैं। पूरे प्रदेश में सार्वजनिक और संस्थागत स्तर पर कुल 1,794 चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए जा चुके हैं। इसके बावजूद सरकारी स्तर पर ईवी वाहनों की खरीद बेहद सीमित रही है।विशेषज्ञों का कहना है कि पेट्रोल-डीजल वाहनों की तुलना में इलेक्ट्रिक वाहनों की शुरुआती लागत अधिक होने, बैटरी और चार्जिंग को लेकर लोगों की चिंता तथा पर्याप्त चार्जिंग नेटवर्क की कमी के कारण ईवी की रफ्तार धीमी रही। हालांकि इंदौर में तेजी से बढ़ते चार्जिंग स्टेशन अब लोगों का भरोसा बढ़ा रहे हैं। ईवी नीति के तहत सार्वजनिक परिवहन में इलेक्ट्रिक बसों को बढ़ावा देने की योजना भी अपेक्षित गति नहीं पकड़ सकी है। फिलहाल इंदौर-भोपाल सहित कुछ शहरों में सीमित स्तर पर इलेक्ट्रिक बसें संचालित हो रही हैं।
विभागीय अधिकारियों का कहना है कि आने वाले समय में सरकारी स्तर पर भी इलेक्ट्रिक वाहनों को प्राथमिकता देने की तैयारी की जा रही है। वहीं इंदौर में लगातार बढ़ रहे चार्जिंग स्टेशन और निजी निवेश को देखते हुए शहर को प्रदेश का सबसे बड़ा ईवी हब माना जा रहा है।