धनतेरस चमका देगी आपकी किस्मत, क्या है शुभ मुहूर्त जाने..

Dhanteras will brighten your luck, know what is the auspicious time..
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भगवान विष्णु के अवतार वैद्यों के आदिदेव भगवान धन्वंतिर का १० नवंबर को जयंती पव्र है। जिस प्रकार विष्णु विश्व पालक है। उसी प्रकार भगवान धन्वंतिर को मानव का रोग रक्षक माना गया है। वे औषधि और शल्य क्रिया में निपुण एक कुशल चिकित्सक भी थे। वैदिक काल में जो महत्व अश्विन कुमारों का था, आगे चलकर वहीं महत्व पृथ्वी लोक पर भगवान धन्वंतिर को भी मिला। वैद्यादिदेव धन्वंतिर का प्रादुर्भाव समुद्र मंथन के दौरान हुआ ऐसी मान्यता है।

मंथन में जिन चौदह रत्नों की प्राप्ति हुई उनमें से एक वैद्यराज अमृत कलश लेकर अवतरित हुए। देवताओं की तरह ही भगवान धन्वंतरि के महत्व को स्वीकारते हुए इस दिन उनकी पूजा की जाती है। धन्वंतिर के लोकोपकारी कार्य आज भी आयुर्वेद वेत्ताआं के लिए आदर्श दिशा-निर्देश है। भगवान धन्वंतिर ने चिकित्सा तत्व विज्ञानतंत्र की रचना की। इस दृष्टि से धन्वंतिर देवयुग के चिकित्सा विशारद थे इसलिए वे प्रथम धन्वंतिर कहलाए।

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सुश्रुतु संहिता के अनुसार प्रथत धन्वंतिर ही पुन: मृत्युलोक में काशी के धन्वराज के पुत्र के रूप में अवतरित हुए और उन्होंने शल्यतंत्र को अष्टांग आयुर्वेद सहित उपदेश दिया। हरिवंश पुराण, ब्रह्मांण पुराण तथा वायु पुराण की वंशावली में कहीं धन्व के पुत्र धन्वंतिर को आयुर्वेद प्रवर्तक बताया गया है। सुश्रुतु संहिता में लिखा गया है कि स्वयं सुश्रुतु के गुरू भगवान धन्वंतिर थे, जिनका मूल नाम दिवोदास था।

भावप्रकाश में उल्लेखित वर्णनानुसार एक बार देवराज इंद्र ने पृथ्वी पर मनुष्यों को बीमारियों से पीड़ित देख धन्वंतिर को आयुर्वेद का उपदेश देकर लोक कल्याण के निहितार्थ पृथ्वी पर भेजा। तब वे काशी के राजा बने और आयुर्वेद का उपदेश दिया।  भगवान धन्वंतिर का अवतरण मानव स्वास्थ्य के निहित हुआ, इसलिए आम जनमानस भी उनकी पूजा, अर्चना, व्रत, आराधना कर निरोग रहने का वरदान प्राप्त कर सकता है। भगवान धन्वंतिर वैद्यों के तो आराध्य हैं ही, मनुष्यों तक आयुर्वेद पहुंचाने के निमित्त मात्र भी हैं, अत: धन त्रयोदशी को हम स्वास्थ्य पर्व की संज्ञा भी दे सकते हैं।

कब रहेगा शुभ मुहुूर्त (Dhanteras auspicious time)

इस बार धनतेरस पर त्रयोदशी तिथि 10 नवंबर 2023 को दोपहर 12 बजकर 35 मिनट पर शुरू होगी और 11 नवंबर 2023 को दोपहर 01 बजकर 57 मिनट तक रहेगी इस दौरान कुछ विशेष सामान जैसे झाड$़ू, हल्दी, नमक, सोना चांदी खरीदने से शुभता बढ़ती है।

– जांगड़ा पोरवाल संदेश

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