धनतेरस पर बन रहे अद्भुत संयोग, इस समय करें खरीददारी

dhanteras muhurat
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धनतेरस हिन्दू धर्म में मनाया जाने वाला प्रसिद्ध त्योहार है। कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि के दिन भगवान धन्वन्तरि का जन्म हुआ था, इसलिए इस तिथि को धनतेरस या धनत्रयोदशी के नाम से जाना जाता है। भारत सरकार ने इसे आधुनिक स्वरुप देने के लिए और लोगों को जोड़ने के लिए धनतेरस को राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया है। सरकार का यह निर्णय सराहनीय है, हमारे धार्मिक त्योहारों, एवं पर्वों को आधुनिक बनाते हुए नव पीढ़ी को जोड़ने से समाज में सकारात्मकता आ सकती है। आज ही के दिन आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति के जन्मदाता धन्वन्तरि वैद्य समुद्र से अमृत कलश लेकर प्रगट हुए थे, इसलिए धनतेरस को धन्वन्तरि जयन्ती भी कहते हैं।

शनिवार का दिन होने के कारण तांबा और पीतक के बर्तनों उससे बनी देव मूर्तियों को खरीदना चाहिए। सोने-चांदी के सिक्के, आभूषण व उससे बनी देव मूर्तियों, रत्न खरीदना शुभकारी रहेगा। झाड़ू जरूर खरीदना चाहिए। झाड़ू मां लक्ष्मी का प्रतीक मानी जाती है, क्योंकि वो घर से दरिद्रता रूपी गंदगी को साफ करती है। झाड़ू खरीदने से घर में सुख-समृद्धि का वास होता है। जबकि तेल, हल्दी व चना की दाल नहीं खरीदना चाहिए।

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त्रयोदशी तिथि की शुरुआत 18 अक्टूबर को दोपहर में 12 बजकर 20 मिनट से होगी। वहीं 19 अक्टूबर रविवार को दोपहर के 1 बजकर 52 मिनट पर त्रयोदशी तिथि समाप्त होगी।

दोपहर तीन से शाम छह बजे तक लाभ व अमृत योग बन रहा है। इसमें खरीदारी करना चाहिए। इसके बाद शाम 7.30 से रात नौ बजे तक शुभ योग रहेगा। खरीदारी के लिए यह भी उपयुक्त समय है।

source – PR