Lucky Numbers: किस्मत बदल सकता है अंक 7

हर अंक का जीवन में अपना अपना महत्व होता है और यह कहीं न कहीं हमारे भाग्य से जुड़ा होता है। अंक सात भी अपना अलग ही महत्व रखता है। आईए जानते है विस्तार से….
भारतीय संस्कृति, साहित्य एवं आध्यात्मिक विचारों में सर्व प्रकार से शुभता के लिए सात का अंक सर्वश्रेष्ठ शुभता कारक एवं जीवन पद्धति में घुल मिल गया है। इसका क्या रहस्य है, यह समझने और सोचने के लिए लेखक को एक विवाह समारोह में पहेली के कार्यक्रम में विवश होना पड़ा क्योंकि वहाँ पर पहेलियां पूछने वाली एक सुसंस्कृत बेटी ने लेखक ने प्रश्न कि विवाह में सात फेरे क्यों लिए जाते हैं। तब लगा कि जनसामान्य में हर प्रकार की हिन्दू दर्शन में होने वाली कितनी उत्सुकता है।
भारत में हिन्दू जीवन में सप्त पुरियों को पूर्ण सम्मान एवं आदर दिया जाता है। अयोध्या, मधुरा, माया, काशी, कांची अवन्तिका। पुरी द्वारावती चैव सप्तैता मोक्ष दायक:। इसके अलावा सप्त नदियों के पूजन अर्चन में जल का प्रयोग तथा पूजा पद्धति में आकाश में स्थित सप्त ऋषि मंडल का ध्यान एवं उनका आदर, सम्मान किया जाता है। इसके अलावा भी सप्त सुरों का संगीत में प्रयोग संगीताकारों को करना पड़ता है।
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एक स्मृति जो पुराणोक्त है कि राजा परीक्षत को ऋषि पुत्र ने सात दिन में मृत्यु को प्राप्त होने का श्राप दिया। पूर्ण विश्व में रविवार से शनिवार तक सात दिन ही होते हैं। अर्थात जन्म हो या विनाश हो, मृत्यु हो, सब कुछ सात दिवस में ही होगा। भारत के जो शूरवीर तथा ज्ञानी ऋषि हुए हैं या जिनकी सम्मानपूर्ण मान्यता है, वह भी सात है। निम्न स्त्रोत से यात्रा भी सुखद होती है।
श्लोक – अश्व थामा बर्लिव्यासी हनुमानश्च विभीषण: कृप: परशुरामश्च, सप्तैता: चिर जीवन: स्प्तैतान – संस्मरेनित्यं मार्वेâण्यमथाष्टमम जीवदे वर्ष शतं सोऽपि (सोअपि) सर्व व्याधि विवर्जित:
उपरोक्त प्रकार से एक संक्षिप्त स्वरूप जाना जाए तो विवाह में सप्तपदी अर्थात सात कदम साथ-साथ चलना जीवन भर का साथ ‘सतां सात पदेन संख्यम’ निवाहना है एवं पूर्ण भावना से अन्तस्थल से समझें और सोचें तो सप्तनद, सप्तसुर, स्पतलोक सप्तऋषि सप्तवार इनको साथ मानकर लेकर संपूर्ण जीवन आनंदमय हो इसके लिए सातभांवर अर्थात् सप्तपदी का विवाह में हमारे ऋषि-मुनियों ने निर्धारण करके सात वाचनों का पालन करने का निर्देश दिया है।
भारतीय ज्योतिष शास्त्र में जो ग्रह आंकों से देखे जाते हैं तथा प्रकाशमान है उनकी संख्या भी सात ही है। अन्य दो ग्रहों की मान्यता छाया ग्रह के रूप में ही की जाती है क्योंकि वे सम्पात्त बिंदु हैं तथा प्रकाशमान नहीं है न उनकी कोई रोशनी है। जन्म कुंडली में १२ घर होते हैं।
प्रत्येक घर का एक विशेष महत्व होता है, किंतु जब भी व्यक्ति के महत्वपूर्ण संस्कार विवाह का प्रश्न आता है तो सप्तम भाव अर्थात पति-पत्नी के भाव का अध्ययन विशेष रूप से किया जाता है। सप्तम भाव में क्रूर ग्रह की स्थिति को ज्योतिष शास्त्री बहुत ध्यान से देखते हैं क्योंकि सप्तम भाव से दैनिक दिनचर्या, जीवन साथी का स्वभाव रूप सुखा देखा जाता है। अन्य क्षेत्रों में न्यायालय संबंधी कार्यलाभाहिन व्यापारिक साझेदारी खोया हुआ धन तथा शरीर के गुप्त स्थान संबंधी जानकारी भी होती है।
सप्तम स्थान संबंधो रोगों का भी ज्ञान किया जाता है। अत: इस पूरे अध्ययन से ज्ञात होता है कि भारतीय आध्यात्मिक एवं सांख्यकीय शास्त्रों ने सात के अंक को शुभता का तथा जीवन से जुड़ा हुआ माना है। इसलिए संतासप्तपदेन संख्यम संतों के साथ सात पद चलने से तो उनके साथ सखा भाव हो जाता है।
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Source – Pramila
