Big News: 21 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 862 फास्ट ट्रैक कोर्ट्स

नई दिल्ली । पेपर लीक से जुड़े मामलों का निपटारा अब फास्ट ट्रैक कोर्ट में होगा। पीएम मोदी ने खुद इसका ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि पेपर लीक मामलों में शामिल लोगों को जल्द और सख्त सजा देने के लिए फास्ट ट्रैक अदालतें बनाने का फैसला लिया गया है। उन्होंने बताया कि इसे लेकर निर्देश जारी कर दिए हैं। पीएम मोदी ने एक्स पर पोस्ट करते हुए बताया कि देश के युवाओं का हित और उनका भविष्य सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई होगी और उन्हें किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।
पीएम मोदी ने कहा कि पेपर लीक के सभी मामलों में दोषियों को जल्द से जल्द कठोर दंड देने के लिए और मामले के जल्द निपटारे के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट्स का गठन किया जाएगा। केंद्र सरकार के मुताबिक मजबूत कानून के बावजूद देश भर की अलग-अलग कोर्ट में रेप और पॉक्सो एक्ट के कई मामले पेंडिंग हैं। कड़ी सजा का मकसद लोगों में डर पैदा करना है लेकिन यह तभी हो सकता है जब ट्रायल तय समय पर पूरा हो और पीड़ितों को जल्द इंसाफ मिले। सबसे पहले 11वें वित्त आयोग ने फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने की सिफारिश की थी। पहली बार साल 2000 में फास्ट ट्रैक कोर्ट बनी थी। 862 fast track courts
बता दें 14वें वित्त आयोग ने 2015-2020 के दौरान देशभर में 1800 फास्ट ट्रैक कोर्ट्स बनाने की सिफारिश की। इनका मकसद गंभीर अपराधों, महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों, दिव्यांगों और 5 साल से ज्यादा पेंडिंग संपत्ति से जुड़े मामलों की तेजी से सुनवाई करना था। वित्त आयोग ने राज्य सरकारों से अनुरोध किया था कि वे टैक्स से मिलने वाले ज्यादा फंड का इस्तेमाल इस काम के लिए करें। 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने पॉक्सो से जुड़े मामलों के जल्द से जल्द निपटारे करने का निर्देश दिया। इसके बाद केंद्र सरकार फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट बनाने की स्कीम शुरू की, जिसके तहत रेप और पॉक्सो से जुड़े मामलों के जल्द निपटारे के लिए देशभर में स्पेशल कोर्ट्स बनाए गए।
इस स्कीम के तहत ऐसे मामलों के ट्रायल के लिए एफटीएससी बनाने के लिए केंद्र सरकार राज्यों की मदद करती है। स्कीम के तहत एफटीएससी बनाने के लिए केंद्र सरकार 60फीसदी पैसा देती है, जबकि बाकी का 40फीसदी राज्यों को लगाना होता है। केंद्र सरकार ने संसद में कुछ आंकड़े दिए थे। 27 मार्च 2026 को लोकसभा में कानून मंत्रालय ने बताया था कि 31 जनवरी 2026 तक 21 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 862 फास्ट ट्रैक कोर्ट्स हैं। सबसे ज्यादा 373 एफटीसी उत्तर प्रदेश में हैं। दूसरे नंबर पर महाराष्ट्र है, जहां 105 ऐसी अदालतें हैं।
source – ems