नेता प्रतिपक्ष की नियुक्ति पर कांग्रेस में बगावत
सामूहिक इस्तीफों की चेतावनी

Rebellion within Congress over the appointment of the Leader of the OppositionRebellion within Congress over the appointment of the Leader of the Opposition
इंदौर। नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष पद पर सोनिला मिमरोट की नियुक्ति के बाद कांग्रेस में असंतोष खुलकर सामने आने लगा है। पार्टी के कई पदाधिकारी और कार्यकर्ता इस फैसले का विरोध कर रहे हैं। विरोध की शुरुआत शहर कांग्रेस के प्राथमिक सचिव राजेश मेवाड़ा के इस्तीफे से हुई है, जबकि विधानसभा-1 क्षेत्र के बड़ी संख्या में पदाधिकारियों ने भी सामूहिक इस्तीफे की चेतावनी दी है।
राजेश मेवाड़ा ने अपने इस्तीफे में आरोप लगाया है कि संगठन ने तीन बार के पार्षद विनीत (दीपू यादव) की लगातार उपेक्षा की है। उनका कहना है कि इस निर्णय से कार्यकर्ताओं की भावनाएं आहत हुई हैं। वहीं ब्लॉक स्तर के कई पदाधिकारियों ने भी नेता प्रतिपक्ष चयन प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। दरअसल, नेता प्रतिपक्ष की दौड़ में वरिष्ठ पार्षद फौजिया शेख अलीम, रुबीना इकबाल खान और विनीतिका यादव के नाम सबसे आगे माने जा रहे थे। निगम और संगठन के भीतर भी इन नेताओं को मजबूत दावेदार माना जा रहा था। इसके बावजूद कांग्रेस संगठन ने सभी वरिष्ठ दावेदारों को दरकिनार करते हुए पहली बार पार्षद बनी सोनिला मिमरोट के नाम पर मुहर लगा दी। कांग्रेस की परंपरा रही है कि नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष का चयन पार्षद दल की बैठक में होता है और निर्वाचित पार्षद अपने नेता का चुनाव करते हैं। लेकिन इस बार प्रदेश संगठन ने सीधे नियुक्ति कर दी, जिससे कई पार्षद और पदाधिकारी खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं। विरोध करने वाले नेताओं का कहना है कि इस निर्णय में पार्षद दल की राय को महत्व नहीं दिया गया और ऊपर से फैसला थोप दिया गया। indore congress
पटवारी व वर्मा की सहमति से मिमरोट की नियुक्ति …
इंदौर। रविवार को गांधी भवन में हुई कांग्रेस की बैठक में तय हो गया था की चिंटू चौकसे को हटाना है। प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी व पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा के बीच हुई चर्चा के पश्चात ये तय हो गया था की नेता प्रतिपक्ष बदलना है।
एक व्यक्ति एक पद की कवायद कांग्रेस में काफ़ी दिनों से चल रही थी, शहर कांग्रेस अध्यक्ष चिंटू चौकसे भी उसी दायरे में आ रहे थे, वरिष्ठ नेता दिग्विजयसिंह से विवाद के बाद चिंटू पर बड़े नेताओं की भी नजऱ थी। उसी विवाद से उनका दो में से एक पद खतरे में आ गया था। प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी कांग्रेस की बड़ी बैठक करने रविवार को गांधी भवन पहुंचे थे, बैठक में सज्जन वर्मा भी थे, बैठक के बाद ही बंद कमरे में पटवारी व वर्मा के बीच निगम नेता प्रतिपक्ष बदलने पर सहमति बन गईं थी। पटवारी जानते थे कि इंदौर में बिना वर्मा की सहमति के हटाना मुश्किल है। इसलिए पटवारी ने वर्मा से लंबी चर्चा की। नामों के चयन पर भी माथापच्ची चली, लेकिन पिछली निगम बैठकों में जिस तरह से पार्षद सोनिला मिमरोट ने पक्ष को आड़े हाथों लिया था उसी को देखते हुए ये निर्णय हुआ। कांग्रेस में अभी चिंटू के बाद सोनिला मिमरोट ही सत्ता पक्ष के खिलाफ मैदान पकड़ते नजऱ आई थी। अब चिंटू को शहर में कांग्रेस को संभालने की जिम्मेदारी है।