Health: गर्मी के मौसम में नाक से खून क्यों आता है

गर्मी के मौसम में नाक सु खून आने की समस्या बच्चों और बुजुर्गों में अधिक देखने को मिलती है, लेकिन किसी भी उम्र के व्यक्ति को प्रभावित कर सकती है। गर्मियों में शुष्क और गर्म हवा के कारण नाक के अंदर की नाजुक परत सूख जाती है, जिससे वहां की रक्त नलिकाएं कमजोर पड़ जाती हैं और आसानी से फट सकती हैं। नाक के भीतर की त्वचा अत्यंत पतली और संवेदनशील होती है, जिसमें छोटी-छोटी रक्त वाहिकाएं होती हैं।
डॉक्टरों के अनुसार, तेज धूप और कम आर्द्रता (ह्यूमिडिटी) के कारण यह परत और अधिक शुष्क हो जाती है। जब कोई व्यक्ति जोर से नाक साफ करता है, छींकता है या अपनी नाक में उंगली डालता है, तो ये कमजोर नलिकाएं टूट सकती हैं और खून बहने लगता है। इसके अलावा, एलर्जी, साइनस की परेशानी, ऊपरी श्वसन पथ का संक्रमण, या नाक में किसी प्रकार की चोट लगने के कारण भी यह समस्या हो सकती है।
कुछ लोगों में उच्च रक्तचाप (हाई ब्लड प्रेशर) या खून को पतला करने वाली दवाइयों का सेवन भी नाक से खून आने की वजह बन सकता है, क्योंकि ये कारक रक्त वाहिकाओं पर अतिरिक्त दबाव डालते हैं या रक्त के थक्के बनने की क्षमता को कम करते हैं। जब अचानक नाक से खून बहने लगे तो सही तरीके से प्राथमिक उपचार करना बेहद जरूरी है। सबसे पहले, व्यक्ति को सीधे बैठ जाना चाहिए और अपने सिर को हल्का सा आगे की ओर झुकाना चाहिए। ऐसा करने से खून बाहर निकलता है और गले में नहीं जाता, जिससे घुटन या उल्टी का खतरा कम होता है। इसके बाद, अपनी नाक के नरम हिस्से को अंगूठे और तर्जनी उंगली से लगभग 5-10 मिनट तक मजबूती से दबाकर रखें। इस दौरान मुंह से सांस लेना बेहतर होता है। माथे या नाक पर ठंडी पट्टी या बर्फ रखने से भी रक्त वाहिकाएं सिकुड़ती हैं, जिससे खून की गति धीमी होती है और वह जल्दी रुकने में मदद करता है। nose bleed during summer
आमतौर पर ये तरीके कुछ ही मिनटों में असर दिखा देते हैं और खून बहना बंद हो जाता है। यदि किसी को बार-बार नाक से खून आने की समस्या होती है, तो कुछ घरेलू सावधानियां अपनाकर इसे काफी हद तक रोका जा सकता है।
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नाक के अंदरूनी हिस्से में हल्का सा नारियल तेल या पेट्रोलियम जेली लगाने से नमी बनी रहती है और सूखापन कम होता है, जिससे नाजुक त्वचा को सुरक्षा मिलती है। गर्मियों में पर्याप्त मात्रा में पानी और अन्य तरल पदार्थों का सेवन करना चाहिए ताकि शरीर हाइड्रेटेड रहे और श्लेष्म झिल्ली (म्यूकस मेम्ब्रेन) में नमी बनी रहे। घर के अंदर की हवा में नमी बनाए रखने के लिए ह्यूमिडिफायर का इस्तेमाल करना भी फायदेमंद होता है, खासकर रात में सोते समय।
Source – ems
