समाज सेवी श्री राजकुमार मेहता हमारे समाज की प्रतिभा

फ़ोन आता है और कोर्ट से राजू भैया पहुंचते हैं जूनी इंदौर श्मशान और टीम के साथ दाह संस्कार करते हैं एक दंपत्ति के शवों का जिनके परिवार ने शव लेने से मना कर दिया.. अमावस्या पर इससे अधिक पुण्य का कार्य क्या हो सकता है । धन्य है टीम सुल्तान ए इंदौर । नमन करते हैं राजू भैया को टीम सुल्तान ए इंदौर को

शहर के एक बंद पड़े मकान से उठी दुर्गंध ने जब लोगों का ध्यान खींचा, तब एक मार्मिक और पीड़ादायक सच्चाई सामने आई। लगभग 15 दिनों से एक घर में पति-पत्नी के शव पड़े थे। न कोई रिश्तेदार सामने आया, न कोई अपना, और न ही अंतिम विदाई देने वाला कोई मौजूद था। यह दृश्य केवल एक घटना नहीं, बल्कि समाज की उस सच्चाई का प्रतिबिंब है जहाँ कई लोग जीवन और मृत्यु दोनों में अकेले रह जाते हैं। पुलिस द्वारा जानकारी मिलने के बाद यह स्पष्ट हुआ कि मृत दंपती लावारिस हैं। ऐसे में जब अधिकांश लोग पीछे हट जाते हैं, तब सुल्ताने इंदौर एकता सेवा समिति एवं महाकाल समिति ने आगे बढ़कर मानवता का परिचय दिया।

वर्षों से समाज सेवा के क्षेत्र में सक्रिय सुल्ताने इंदौर एकता सेवा समिति एवं महाकाल समिति आज इंदौर के लिए गर्व और भरोसे का नाम बन चुकी है। संस्था के जय्यु जोशी, करीम खान, फिरोज़ खान, सुरेश मोरे, अजय नागदा ने सामाजिक व धार्मिक विधि विधान के साथ दंपती का सम्मानपूर्वक अंतिम संस्कार संपन्न कराया। यह अंतिम संस्कार केवल एक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि उन आत्माओं को दिया गया सम्मान था, जिनके जीवन में शायद कोई अपना साथ नहीं था। सुल्ताने इंदौर एकता सेवा समिति पिछले कई वर्षों से लावारिस बुजुर्गों, असहायों, बेसहारा लोगों और जरूरतमंदों की सेवा में निरंतर लगी हुई है। यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि इंदौर सिर्फ स्वच्छता के लिए ही नहीं, बल्कि संवेदनशीलता और इंसानियत के लिए भी जाना जाता है। ऐसी संस्थाएँ शहर की आत्मा होती हैं, जो यह विश्वास दिलाती हैं कि कोई भी इंसान लावारिस नहीं होता, अगर समाज जागरूक और संवेदनशील हो। अंत में दिवंगत दंपती की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की गई और समाज से अपील की गई कि अपने आसपास रहने वाले लोगों की समय रहते सुध लें, ताकि कोई भी व्यक्ति इस तरह गुमनामी और अकेलेपन में जीवन या मृत्यु न पाए।