युद्ध से एलपीजी पर संकट, सिर्फ 16 दिन का है स्टॉक

Due to the crisis caused by the war, there is only 16 days of stock
Due to the crisis caused by the war, there is only 16 days of stock

नई दिल्ली। ईरान के परमाणु स्थलों पर अमेरिकी हमलों ने दुनिया के सबसे बड़े तेल उत्पादक क्षेत्र से आपूर्ति रुकने की आशंकाएं और बढ़ा दी हैं। ऐसी स्थितियों की तैयारी में भारतीय नीति निर्माताओं और उद्योग नेताओं ने यह माना है कि सभी ईंधनों का जोखिम एक जैसा नहीं है। पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने पर एलपीजी सबसे ज्यादा असुरक्षित है। हालांकि एलपीजी अमेरिका, यूरोप, मलेशिया या अफ्रीका के कुछ हिस्सों जैसे वैकल्पिक स्रोतों से भी मंगाई जा सकती है, लेकिन इन देशों से माल भारत पहुंचने में अधिक समय लगेगा। वहीं, पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) सिर्फ 1.5 करोड़ भारतीय घरों तक ही पहुंची है। इसलिए यह देश के 33 करोड़ एलपीजी कनेक्शनों के लिए व्यावहारिक विकल्प नहीं है। वहीं दूसरी तरफ केंद्रीय मंत्री ने कहा है कि भारत के पास कई हफ्तों के लिए तेल भंडार पर्याप्त है।

पिछले एक दशक में, सरकार के प्रयासों से भारत में एलपीजी का इस्तेमाल दोगुना होकर 33 करोड़ घरों तक पहुंच गया है। इससे देश की आयात पर निर्भरता बढ़ी है। कुल एलपीजी का लगभग 66 प्रतिशत हिस्सा विदेशों से आता है और इसका करीब 95 प्रतिशत हिस्सा सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और कतर जैसे पश्चिम एशियाई देशों से आता है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, भारत के पास आयात टर्मिनलों, रिफाइनरियों और बॉटलिंग प्लांट्स में जितनी एलपीजी जमा करने की क्षमता है, वह राष्ट्रीय औसत खपत के सिर्फ लगभग 16 दिनों के लिए ही पर्याप्त है।पेट्रोल और डीजल के मामले में देश की स्थिति कहीं बेहतर है। भारत इन दोनों का शुद्ध निर्यातक देश है। यह अपनी घरेलू पेट्रोल खपत का लगभग 40 प्रतिशत और डीजल खपत का करीब 30 प्रतिशत हिस्सा निर्यात करता है। जरूरत पड़ने पर इन निर्यात मात्राओं को घरेलू बाजार की ओर आसानी से मोड़ा जा सकता है।ज्यादातर जगहों पर सार्वजनिक वितरण प्रणाली से मिट्टी के तेल (केरोसिन) की सप्लाई बंद होने के बाद, शहरों में अगर एलपीजी की कमी होती है तो बिजली से खाना बनाना ही एकमात्र व्यवहारिक विकल्प बचता है।

कच्चे तेल के मामले में, रिफाइनरियों, पाइपलाइनों, जहाजों और राष्ट्रीय रणनीतिक पेट्रोलियम स्टॉक (एसपीआर) में मौजूद स्टॉक रिफाइनरियों के संचालन को लगभग 25 दिनों तक चला सकते हैं।
इजरायल-ईरान तनाव के बीच भी रिफाइनरियां जमाखोरी करने या घबराकर ज्यादा खरीदारी करने से बच रही हैं। उन्हें विश्वास है कि आपूर्ति श्रृंखला के रुकने की संभावना कम है। एक अनाम अधिकारी ने कहा, अगर हम अभी ऑर्डर भी दें, तो माल अगले महीने या उसके बाद ही पहुंचेगा। इसके अलावा, हमारे पास अतिरिक्त तेल जमा करने की सीमित क्षमता है। जब बाधा का खतरा कम है, तो कार्यशील पूंजी को बांधना समझदारी नहीं है।

भारत के पास है पर्याप्त तेल भंडार: पुरी

केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने अपने एक बयान में कहा है, कि तीसरे सबसे बड़े तेल आयातक और चौथे सबसे बड़े गैस खरीदार भारत के पास अब भी कई हफ्तों की आवश्यकताओं के लिहाज से पर्याप्त ऊर्जा आपूर्ति मौजूद है और देश को कई अन्य मार्गों से आपूर्ति प्राप्त हो रही है। केंद्रीय मंत्री ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए कहा, कि ‘सरकार पिछले दो सप्ताह से पश्चिम एशिया में बदलती भू-राजनीतिक स्थिति पर बारीक नजर रखे हुए है। इसी के साथ उन्होंने कहा, कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में, पिछले कुछ वर्षों में हम अपनी आपूर्ति में विविधता लाए हैं और अब हमारी आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से नहीं आता है।
यहां बताते चलें कि होर्मुज जलडमरूमध्य पश्चिम एशिया से आने वाले तेल के लिए एक महत्वपूर्ण पारगमन मार्ग माना जाता है, जिसे ईरान अपने परमाणु प्रतिष्ठानों पर अमेरिकी हमलों के बाद बंद करने की दिशा में कदम आगे बढ़ा चुका है।

source – ems