बिना चीनी वाला सादा दूध डायबिटीज के मरीजों के लिए सुरक्षित और फायदेमंद!

डायबिटीज के मरीज सोचते हैं कि दूध में मौजूद प्राकृतिक शुगर उन्हें नुकसान पहुंचा सकती है, लेकिन हेल्थ एक्सपर्ट्स की राय इसके बिल्कुल उलट है। वे मानते हैं कि बिना चीनी वाला सादा दूध डायबिटीज के मरीजों के लिए सुरक्षित और फायदेमंद है। सादा दूध में लैक्टोज नामक प्राकृतिक शुगर होती है, जो धीरे-धीरे ग्लूकोज में बदलती है। इससे ब्लड शुगर अचानक नहीं बढ़ता और नियंत्रण में रहता है। दूध का ग्लाइसेमिक इंडेक्स लगभग 46 होता है, जो मॉडरेट श्रेणी में आता है। इसके अलावा, दूध में मौजूद प्रोटीन से इंसुलिन का रिलीज भी होता है, जिससे ब्लड शुगर नियंत्रित रहता है।
सादा दूध शरीर को आवश्यक पोषक तत्व भी प्रदान करता है, जिनमें कैल्शियम, प्रोटीन, आयोडीन और विटामिन बी12 शामिल हैं। ये तत्व हड्डियों, मांसपेशियों और तंत्रिका तंत्र के लिए बेहद जरूरी हैं। वहीं, फ्लेवर्ड दूध या एडेड शुगर वाले विकल्प जैसे चॉकलेट दूध, स्ट्रॉबेरी दूध, मिल्कशेक और कैफे लट्टे डायबिटीज के मरीजों के लिए नुकसानदेह हो सकते हैं। इनमें शुगर की मात्रा बहुत अधिक होती है और यह तेजी से शरीर में अवशोषित होकर ब्लड शुगर को अचानक बढ़ा सकती है। लगातार इनका सेवन करने से न केवल डायबिटीज कंट्रोल से बाहर हो सकता है, बल्कि अन्य स्वास्थ्य समस्याएं भी पैदा हो सकती हैं।
डायबिटीज के मरीजों को सलाह दी जाती है कि वे हमेशा सादा दूध का सेवन करें और फ्लेवर्ड व शुगर मिल्क से दूरी बनाए रखें। इससे ब्लड शुगर नियंत्रण में रहता है, शरीर को जरूरी पोषक तत्व मिलते हैं और हड्डियों और दांतों की सेहत भी बनी रहती है। इसके अलावा, सादा दूध दांतों की सुरक्षा के लिए भी बेहतर है क्योंकि इसमें कम शुगर होती है और कैविटी का खतरा कम होता है। कुल मिलाकर, डायबिटीज में सादा दूध एक सुरक्षित और पोषण से भरपूर विकल्प है, जबकि फ्लेवर्ड या शुगर वाला दूध स्वास्थ्य के लिए हानिकारक साबित हो सकता है।
source -ems
