इंदौर में एचपीवी टीकाकरण अभियान पर मीडिया उन्मुखीकरण कार्यक्रम आयोजित
विशेषज्ञों ने बताया—गर्भाशय ग्रीवा कैंसर से बचाव के लिए एचपीवी वैक्सीन सुरक्षित और प्रभावी

इंदौर, इंदौर जिले में बुधवार को एच.पी.वी. टीकाकरण अभियान के संबंध में मीडिया उन्मुखीकरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर इंदौर की प्रख्यात स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. आशा बक्षी, एम.जी.एम. मेडिकल कॉलेज के स्त्री रोग विभाग के विभाग प्रमुख डॉ. निलेश दलाल और शिशुरोग विशेषज्ञ डॉ. पराग गांधी उपस्थित थे।
इस अवसर पर डॉ. आशा बक्षी ने कहा कि एच.पी.वी. टीका नया नहीं है, यह 2006 से लगाया जा रहा है और इसके परिणाम काफी अच्छे हैं। मैं स्त्रीरोग विशेषज्ञा के तौर पर इस वैक्सीन को लगवाने की पुरजोर अनुशंसा करती हूँ, क्योंकि इस आयु वर्ग में वैक्सीन लगाने का यह सबसे उचित समय है, जो कि किशोरियों को एक मजबूत सुरक्षा कवच प्रदान करता है। आमजन से अनुरोध है कि वह किसी भी अप्रमाणिक तथा गलत तथ्यों पर आधारित किसी भी प्रचार सामग्री पर भरोसा न करें।
डॉ. पराग गांधी ने कहा कि आस्ट्रेलिया ऐसा देश है, जिसने एचपीवी टीकाकरण के माध्यम से इस बीमारी का लगभग उन्मूलन कर दिया है। हमारे यहाँ सरकार इस महंगे टीके को निःशुल्क लगा रही है, हमें समझाना होगा कि यह टीका किशोरों की स्वास्थ्य रक्षा के लिए कितना आवश्यक है। आज यह टीका लगेगा तब हम भविष्य में इसके सुखद परिणामों को देख पाएंगे।
इस अवसर पर डॉ. निलेश दलाल ने कहा कि भारत सरकार की मंशा के अनुरुप इस टीकाकरण अभियान को सफल बनाने का दायित्व हम सभी का है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. माधव हासानी ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि इंदौर में 38 वैक्सीनेशन सेंटर पर यह टीके लगाए जा रहे हैं। वर्तमान में HPV वैक्सीन के संबंध में कुछ भ्रांतियां जनमानस में फैली हुई है, जबकि HPV वैक्सीन के संबंध में वास्तविक तथ्य है कि Human Papillomavirus (HPV) वैक्सीन महिलाओं को गर्भाशय ग्रीवा (सर्वाइकल) कैंसर से बचाने के लिए शुरू की जा रही है। वर्तमान में काडिवैलेंट वैक्सीन उपलब्ध कराई जा रही है।
सर्वाइकल कैंसर गर्भाशय के निचले हिस्से (सर्विक्स) का कैसर होता है। भारत में सर्वाइकल कैंसर महिलाओं में होने वाला दूसरा सबसे आम कैंसर है। लगभग 99.7% सर्वाइकल कैंसर के मामलों का कारण Human Papillomavirus (HPV) होता है। भारत में सर्वाइकल कैंसर महिलाओं में होने वाला दूसरा सबसे आम कैंसर है। साल 2022 में सर्वाइकल कैंसर के लगभग 79,103 नए मामले और 34,805 मौतें दर्ज की गईं। महिलाओं में, कुछ खास HPV प्रकार (ज्यादातर HPV-16 और HPV-18) का लगातार संक्रमण होने पर गर्भाशय ग्रीवा में पहले से कैंसर बनने वाले घाव (Precancerous Lesions) बन सकते हैं। अगर इन्हें समय पर उपचार न किया जाए, तो ये घाव गर्भाशय ग्रीवा कैसर में बदल सकते हैं।
गर्भाशय ग्रीवा कैंसर को समाप्त करने की वैश्विक रणनीति प्रस्तावित करती है कि एक ऐसा विश्व तैयार किया जाए जहाँ गर्भाशय ग्रीवा कैंसर सार्वजनिक स्वास्थ्य की समस्या न रहे। सार्वजनिक स्वास्थ्य की समस्या के रूप में इसे समाप्त मानने के लिए 100,000 महिलाओं में 4 या उससे कम मामले होने चाहिए और देशों को 2030 तक 90-70-90 लक्ष्य पूरा करना अनिवार्य है ताकि वे गर्भाशय ग्रीवा कैंसर उन्मूलन की दिशा में आगे बढ़ सकें। मई 2025 तक, 148 देश (75.3%) ने अपनी राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रमों में HPV वैक्सीन को शामिल किया है।
सभी वैक्सीनों की तरह, HPV वैक्सीन की सुरक्षा और प्रभावशीलता का लगातार और ध्यानपूर्वक परीक्षण किया जाता है। अध्ययनों ने HPV वैक्सीन की सुरक्षा और प्रभावशीलता को साबित किया है। 2006 में लाइसेंस मिलने के बाद से, 500 मिलियन से अधिक डोज़ HPV वैक्सीन वितरित की जा चुकी है। लाइसेंस मिलने के बाद की निगरानी में अब तक कोई गंभीर सुरक्षा समस्या सामने नहीं आई है केवल बहुत ही दुर्लभ मामलों में एलर्जिक प्रतिक्रिया (Anaphylaxis) की रिपोर्ट मिली है।
भारत में, चार HPV वैक्सीन (Cervarix, Gardasil, Gardasil-9 और Cervavac) को DCGI द्वारा उपयोग के लिए लाइसेंस दिया गया है। HPV वैक्सीन महंगी है। वर्तमान में, निजी बाजार में एक डोज़ की कीमत लगभग 4000 रुपये है। किशोरी बालिकाओं में HPV वैक्सीन की एक डोज़ प्रभावी होती है और लगातार HPV संक्रमण से पर्याप्त सुरक्षा प्रदान करती है।
Gardasil, quadrivalent HPV वैक्सीन एक तरल वैक्सीन है, जो 0.5 ml की खुराक में इंट्रामस्कुलर (IM) तरीके से बाएँ ऊपरी हाथ में दी जाती है।
भारत में HPV वैक्सीन को अभियान मोड (Campaign Mode) में 14 वर्षीय लड़कियों के सिंगल-एज समूह (Single-age Cohort) के लिए पेश किया गया है (वे लड़कियाँ जिन्होंने अपना 14वां जन्मदिन मना लिया है लेकिन 15वां जन्मदिन अभी तक नहीं मनाया है)।
वर्तमान में, भारत सरकार केवल 14 वर्ष की लड़कियों को HPV वैक्सीन देने की सिफारिश करती है, लड़कों को नहीं। HPV लड़कियों, लड़कों, महिलाओं और प्रजनन आयु के पुरुषों को प्रभावित कर सकता है, लेकिन महिलाओं में संक्रमण की दर बहुत अधिक होती है और यह बाद में गर्भाशय ग्रीवा (Cervical) कैंसर का कारण बन सकता है, जो महिलाओं में एक साइलेंट किलर (Silent Killer) है। इसके अलावा लड़कियों में 80% से अधिक कवरेज हासिल करने से तड़कों में HPV संक्रमण का जोखिम भी कम हो जाएगा।
HPV टीका सभी योग्य किशोरियों को दिया जाना चाहिए चाहे वे किसी भी राज्य से आई हो, बशर्ते उन्होंने पहले HPV टीके की कोई खुराक न ली हो। यदि लाभार्थी मासिक धर्म में है, तब भी HPV वैक्सीन लगाना सुरक्षित है।
जब तक डॉक्टर द्वारा पुष्टि न हो, आपको यह पता नहीं चलेगा कि आप पहले से HPV से संक्रमित हैं। यदि आप सुझाई गई आयु सीमा में हैं, तो HPV वैक्सीन लेना सुरक्षित और अनुशंसित है।
दिशा निर्देशों के अनुसार अगर यह पुष्टि हो चुकी है कि लाभार्थी को पहले ही किसी भी लाइसेंस प्राप्त HPV वैक्सीन की एक खुराक दी जा चुकी है, तो उसे अभियान के तहत क्वाड्रिवैलेन्ट वैक्सीन नहीं दी जानी चाहिए।
अगर लाभार्थी की उम्र सत्यापित नहीं की जा सकती तो कृपया माता-पिता/अभिभावक से दिए गए फॉर्मेट में एक शपथ-पत्र लें और लाभार्थी को टीका लगाएं। यह शपथ-पत्र U-WIN में अपलोड किया जाना चाहिए।
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