अभिनंदनीय भावांजलि

जीवन मरण के प्रवाह के बीच बहने वाली जीवन सरिता जब परमात्मा रूपी सागर से मिलती है, आत्मा की दिव्य ज्योति परमात्मा की तेजोनिधि में विलीन हो जाती है!
रह जाता है सिर्फ मनुष्य के कर्मों का प्रकाश….💫🌟
अत्यन्त विनम्र, सरल हृदयी, उदारमना
ब्रम्हलीन पुण्यात्मा
“नेत्रदानी श्री रमेशचन्द्रजी पोरवाल”
अपनी देह छोड़कर भी अपने सद्कर्म के प्रकाश का उजाला दो आंखों की रोशनी के लिए छोड़ गये…
उनके नेत्र की ज्योति से दो दृष्टिहीन व्यक्ति दुनिया देख सकेंगे..।
परोपकारी मनुष्य कभी दिवंगत नही होते, वो तो लोगो के दिलो में अमर हो कर जीवित रहते है… अपने सद्कर्म की खुशबु से महकते रहते है…!!
प्रभुलीन पुण्यात्मा मामाश्री “रमेशचंद्रजी पोरवाल” अपने जीवन व्यक्तित्व और कर्म पुण्य की खुशबु को कुछ इस तरह महका गये कि सदियो तक उनका व्यक्तित्व खुशबू की तरह महकता रहेगा…!!
ईश्वर उन्हें अपने अनंत ब्रम्हांड में आलौकिक रखे…🙏🏻

भाई अखिलेश पोरवाल, धनोतिया परिवार व नेत्रदान के पुण्य सद्कर्म में समर्पित सभी स्वजनों का नेत्रदान के प्रति समर्पित मुस्कान ग्रुप के दिलीपजी मेहता एवं पोरवाल समाज के वरिष्ठ लेखराजजी पोरवाल, सुभाषजी धनोतिया ने अभिनंदन पत्र देकर आभार व्यक्त किया
🙏 🙏🙏🙏🙏🙏
भाव अभिव्यक्ति ✍🏻 शैलेन्द्र पोरवाल