निगम फर्जी बिल घोटाला, महापौर ने कहा कड़ी कार्रवाई होगी

Corporation fake bill scam, Mayor said strict action will be taken
Corporation fake bill scam, Mayor said strict action will be taken

इन्दौर। नगर निगम में हुए फर्जी बिल घोटाले में अब 50 लाख रूपये से अधिक के विकास कार्यो की फाइल की जांच की जाएगी। पूरा घोटाला 107 करोड़ का है और पुलिस ने अब तक 5 ठेकेदारों सहित कुल 9 आरोपियों को गिरफतार किया है। मुख्य आरोपी अभय राठौर भी पिछले दिनों उत्तर प्रदेश के एटा जिले से पुलिस के हत्थे चढ़ गया।

सभी आरोपी जेल में हैं और रिमांड भी चल रहा है। ड्रेनेज विभाग की यह फाइलें जांच के लिए मांगी गई हैं। 5 से 7 वर्षों के बीच हुए कार्यों की फाइलें जांची जाएंगी। इस जांच के बाद और भी फर्जीवाड़ा मिल सकता है। इसी तरह अन्य विभागों में भी विकास कार्यों की फाइलें जांची जाएंगी। जनकार्य विभाग द्वारा बनाई जाने वाली सड़कों की फाइलें भी जाएगी। महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने कल निगम मुख्यालय में पत्रकारों से चर्चा के दौरान कहा कि आरोपियों को बक्षा नहीं जाएगा।

लोकसभा चुनाव के तहत जिले में मतदान संपन्न हो गया और अब करीब एक महीने से चल रहे निगम के फर्जी बिल घोटाले में जांच को लेकर आयुक्त ने संकेत दिये हैं कि 50 लाख से अधिक की फाइलें जांची जाएगी जिससे यदि ओर कोई गड़बड़ी हो तो वह भी पकड़ आ जाए और जिम्मेदारों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा सके। बताया गया है कि पिछले 5 से 7 वर्षों में निगम करोड़ों की ड्रेनेज डाल चुका है जिसमे ंकई जगह गड़बड़ी बताई गई है।

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विभाग से जो टेंडर जारी किये गये थे उनके अनुसार वर्कऑर्डर जारी हुए ओर ठेकेदारों को काम होने के बाद भुगतान किया गया, मगर फर्जी बिल वाले मामले में जांच की जा रही है। अधिकारियेां के मुताबिक जिस जिस वार्ड में यह काम हुए हैं वहां मोके पर जाकर भी जांच अधिकारी जाएंगे और यदि काम नहीं हुआ तो संबंधित ठेकेदार और इंजीनियर के खिलाफ कार्रवाई करते हुए थाने में एफआईआर दर्ज करवाई जाएगी। जनकार्य विभाग में भी फर्जी फाइलों का मामला बताया गया है। यहां वर्षाों से कई इंजीनियर जमे हुए हैं और झोन पर तबादले के बाद भी वापस यहीं आ जाते हैं।

सूत्रों के अनुसार शहर में कई वार्डों में सड़कें नहीं बनी मगर फाइल बनाकर भुगतान भी करवा लिया गया। जनकार्य शाख के अलावा अन्य शाखाओं में भी इसी तरह से भ्रष्टाचार होना बताया गया है। इसी तरह स्वास्थ्य, शाला प्रकोष्ठ, पुल पुलिया शाखा, उद्यान शाखा में भी फर्जी फाइलों पर भुगतान होना बताया जा रहा है। जांच में अन्य शाखाएं भी ली जा सकती हैं।

भोपाल की कमेटी अब तक नहीं आई

इधर राज्य सरकार ने पूरे घोटाले की जांच के लिए जो कमेटी बनाई है उसने अब तक जांच शुरू नहीं की है। कमेटी के अध्यक्ष प्रमुख सचिव हैं और भोपाल के ही अन्य अधिकारी शामिल हैं। महापौर भार्गव ने कहा कि एक दो दिन में कमेटी आ जाएगी और जांच शुरू हो जाएगी। वहीं आयुक्त शिवम वर्मा ने जो कमेटी बनाई थी उसमें इंजीनियरों को क्लीन चिट देना बताया गया है। किसी भी इंजीनियर को दोषी नहीं माना गया है। हालांकि पुलिस में जो एफआईआर की गई है उसके अनुसार 9 आरोपी हैं और गिरफतार कर जेल भेज दिय गया है।