शास्त्री पुल की ऊंचाई बढ़ेगी अब आर्किटेक रेलवे का होगा

Shastri Bridge will be elevated and the architect will now be from the Railways.
Shastri Bridge will be elevated and the architect will now be from the Railways.

इन्दौर शास्त्री ब्रिज के निर्माण को लेकर रेलवे तैयार हो गया है। ऊंचाई बढ़ाने के साथ अब इसकी तीसरी भुजा को भी खत्म करने की तैयारी की जा रही है। रेलवे के सर्वे में ब्रिज की ऊंचाई बढऩे से यह भुजा अनुपयोगी हो जाएगी।

70 साल पुराने शास्त्री ब्रिज के बोगदों की ऊंचाई लगभग 5 से 7 फीट बढ़ाने की तैयारी की जा रही है। इससे रेल की बिजली लाइन बोगदे से सटकर नहीं चलेगी, जिससे आएदिन होने वाले फॉल्ट से बचा जा सका और गाडिय़ों को सामान्य स्पीड में लाया जा सकेगा। इसके बाद आने-जाने वाली गाडिय़ों का कॉशन आर्डर में नहीं लेना पड़ेगा। इसके निर्माण के बाद प्लेटफार्म और गाड़ी के बीच का कर्व खत्म होगा, जिससे गाड़ी प्लेटफार्म से चिपककर खड़ी होगी। शास्त्री ब्रिज से पटेल ब्रिज तक पटरियों में हल्का सा 29 डिग्री का कर्व याने घुमावदार बनने वाले ब्रिज को मानक मानकर पटरियों का हल्का सा टेढ़ापन दूर होगा। इसका ज्यादा फायदा प्लेटफार्म नंबर 3 और 4 को मिलेगा। गाड़ी शुरु होते ही इस कर्व और गाड़ी के बीच रेलवे पुलिस को खड़ा रहना पड़ता है। रेलवे की यशवंत टाकीज वाली भुजा अब यातायात के लिए भी काम नहीं आती इसे हटाया जाए है तो स्टेशन को जगह मिल सकती है। वहीं एक प्लेटफार्म और मिल सकता है।

इसका मतलब दो बोगदों से गाड़ी चल सकती है। शास्त्री ब्रिज दो सेक्शन में बनेगा। मतलब ट्रैफिक एक तरफ से जायेगा और शास्त्री ब्रिज का दूसरी भुजा से जाएगा। इसके बाद आएदिन लगने वाले जाम की स्थिति से आसानी से निपटा जायेगा। इसी तरह तीसरी भुजा खत्म की जाएगी तो गांधी स्टेच्यू से लेकर प्लेटफार्म पर आवागमन सुलभ हो जाएगा। रेलवे जो प्लान बना रहा वह अगले 35 सालों के इन्दौर को देखते बना रहा है।

प्लान पर रतलाम और मुंबई में रेलवे के सिविल विभाग की हर हप्ते बैठके हो रही है। उधर, यह प्लान जल्दी और आधुनिक बनाने में नगर निगम की भूमिका महत्व पूर्ण होगी। दो जगह नर्मदा और ड्रेनेज की लाइन है, उसे पहले हटाना होगा, जो निगम की वित्तीय व्यवस्था के कारण समय लग सकता है। रेलवे तो 150 करोड़ से 200 करोड़ लगाने को तैयार बैठा है। मुख्य सिविल इंजीनियर भी यही चाहते हंै कि पूरा काम ही कर लिया जाये ताकि यात्री की मुसीबतें दूर हो। रेलवे के आर्किटैक्चर के साथ इंजीनियर अब निजी आर्किटेक्चरों की मदद ले रहा है।